Hum Kahan Ja Rahe Hain || हम कहाँ जा रहे हैं
दोस्तों ,कल मैंने फेसबुक पर एक पोस्ट देखा ,एक गावं की लड़की ने डाला था ,आज मेरे हबी का बर्थडे है ,क्या आपलोग उनको विश नहीं करेंगे ? देखिये ,, यहाँ बात गावं की या शहर की लड़की की नहीं है ,बात ये है की आज हम कहाँ से कहाँ आ गए हैं ,समझ ही नहीं आता ,इसलिए मेरे मन में ख्याल आया कि ,,
जाने हम किस ओर कहाँ जा रहे हैं
कब हस्बैंड से हबी हो गया
टेलीविज़न अब टी बी बन गया
बाबूजी अब डैड बन गए हैं
अम्मा भी अब मॉम हो गयी
प्रणाम अब बाय बाय बन गया
चरण स्पर्श में चरण नहीं है
घुटने छू के नमस्ते किये जा रहे हैं
जाने हम किस ओर कहाँ जा रहे हैं
लैपटॉप को लेपी बोला जा रहा है
बहना भाई सिस ब्रो हो गए हैं
दोस्त अब डूड बन गए हैं
रिश्तों का कोई वजूद नहीं रहा
उलटी गंगा हर ऒर बहा रहे हैं
जाने हम किस ओर कहाँ जा रहे हैं
पीला बल्ब अब एल ई डी बन गया
बाग़ बगीचे अब गार्डन और लॉन बन गए
घर का आँगन अब लॉबी बन गया
घर के त्यौहार फेस्टिवल बन के रह गए
परिवार अब केवल फैमिली बन गयी
घर के बुजुर्ग वृद्धाश्रम में रहने लग गए हैं
प्यार मोहब्बत सब खतम होते जा रहे हैं
जाने हम किस ओर कहाँ जा रहे हैं
धन्यवाद्
सुनीता श्रीवास्तवा

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