Kal Hi Ki To Baat Hai || कल ही की तो बात है


 कल ही की तो बात है जैसे 
 हम जिस बारिश में छप छपाक करते थे
आज उसी बारिश में वायरस दिखने लगे हैं 
रहते थे बेपरवाह कि कौन क्या कहेगा हमें 
आज बारिश में मोबाइल उठाके चल पड़ते 
अपने अलग अंदाज में रील बनाने में लगे हैं 
 कल ही की तो बात है जैसे 
सोचते थे,ये बरखा रुके न,होती रहे बेहिसाब 
छुट्टी हो जाये स्कूल की ,बंद हो कॉपी किताब 
आज दुआ करते हैं ,बंद हो जल्दी ये बारिश 
कहीं देर न हो जाये दफ्तर जाने की खातिर 
बॉस न हो जाये नाराज, ये सोच डरने  लगे हैं 
 कल ही की तो बात है जैसे 
बारिश हो धुवांधार तो दौड़ के रफ कॉपी लाते 
अलग-अलग तरीके से कागज के नाव बनाते 
बड़ी चाव से फिर घर के आँगन में उसे चलाते 
मेरी कश्ती है सबसे आगे हो हो कर चिल्लाते
अब तो ना वो आँगन रह गया ना ही बरामदा 
अब तो बारिश को बालकॉनी से देखने लगे हैं 
 कल ही की तो बात है जैसे 
कौन कहता है कि वो बचपन गुजर गया है 
एक बार वो कश्ती फिर से बना के तो देखो 
कोई कीटाडु कोई वाइरस नहीं है इसमें 
एक बार फिर इस बरखा में नहा के तो देखो 
कौन बताये बारिश भी वही है मौसम भी वही है  
ये बस हमी हैं जो अब खुद को बदलने लगे हैं 
 कल ही की तो बात है जैसे 
धन्यवाद 
सुनीता श्रीवास्तवा 

कोई टिप्पणी नहीं

Thanks For Reading This Post