Mujhe Koi Shikayat Nahin || मुझे कोई शिकायत नहीं


किसने क्या किया मुझे कोई शिकायत नहीं 

क्योंकि गैरों को छेड़ने की मेरी आदत नहीं

मतलबी दुनिया में कोई अपना नहीं लगता 

कौन मुझे सच्चा कहता, कौन गलत कहता  

इन सब बातों सेअब कुछ फर्क नहीं पड़ता

जिसका जो दिल करता बोल के चला जाता 

अब किसी की बातों का अनिष्ट नहीं लगता 

बहुत सोच लिया औरों की खुशियों के लिए 

किसी दूसरे को कभी कोई संताप ना पहुंचे

कहीं किसी के अंतर्मन को आघात न पहुंचे  

अब तलक इसी बात के लिए समंजन किये

अब जो भी है जैसा भी है सब कुछ ठीक है 

अब किसी अपने बेगाने से रही चाहत नहीं 

क्योंकि गैरों को छेड़ने की मेरी आदत नहीं

अच्छी बात है मैंने उम्मीद छोड़ दी औरों से 

अब दुःखता नहीं है मन किसी के शब्दों  से 

पहले बातें लग जाया करती थी कभी कभी 

अब कोई उलझन नहीं किसी के लहजों से 

दुनिया की भीड़ में जो छोड़ गए वो भी ठीक 

जो अब तक साथ निभा जा रहे वो भी ठीक 

किसी से शिकवा नहीं कोई अरमान है नहीं 

हर ख़ुशी हर दर्द के लिए शुक्राना शुकराना 

किसी से न कोई बैर नहीं कोई बगावत नहीं 

क्योंकि गैरों को छेड़ने की मेरी आदत नहीं

किसने क्या किया मुझे कोई शिकायत नहीं 

क्योंकि गैरों को छेड़ने की मेरी आदत नहीं

धन्यवाद् 

सुनीता श्रीवास्तवा 



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