Kovid K Din || कोविड के दिन
बरसों बाद ,
सोई मैं माँ की ममता भरी गोद में
रखते ही सर गोद में ,ऐसा लगा जैसे
पूरी हो गयी अरसों की प्यासी नींद
मां ने हौले से सहलाया मेरा माथा
लगा रूह को कितनी सुकून आयी
मुझे लाड दिखाते धीरे से मुस्कुरायी
बोली, देखो न ,कोविड दौर चल रहा
हर कोई एक दूजे से दूर भी हो रहा
कहने को सोशल डिस्टैन्सिंग भी है
फिर भी रिश्ते कितने करीब हो गए
बरसों बाद ,
सोई मैं माँ की ममता भरी गोद में
ऐसा लगा जैसे वक्त ठहर सा गया
उनका कोमल स्पर्श कुछ कह गया
फिर से देख रहे हैं हम एक दूजे को
बस यूँ लग रहा था ,माँ बोलती जाये
मैं सुनती जावूं ,बस सुनती ही जावूं
जाने कल फिर ये पल आये न आये
क्या कहूं मैं , इस कोविड की कहानी
किसी को हंसाया ,किसी को रुलाया
किसी के फिर से इतने समीप हो गए
बरसों बाद ,
सोई मैं माँ की ममता भरी गोद में
धन्यवाद्
सुनीता श्रीवास्तवा


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